भारत-श्रीलंका मैच के बीच गंभीर से मिले गैरी कर्स्टन, प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताई मुलाकात की वजह

गॉल, 20 अगस्त 2026। क्रिकेट के मैदान पर भारत और श्रीलंका भले ही एक-दूसरे के खिलाफ उतरे हों, लेकिन दोनों टीमों के कोचों के बीच पुराना रिश्ता एक बार फिर चर्चा में आ गया। गॉल टेस्ट के दौरान भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर और श्रीलंका के मुख्य कोच गैरी कर्स्टन की मुलाकात हुई। दोनों पहले भारतीय टीम के साथ काम कर चुके हैं और 2011 वनडे विश्व कप की ऐतिहासिक जीत में उनकी अहम भूमिका रही थी। मुलाकात को लेकर कर्स्टन ने बताया कि दोनों ने पुरानी यादों के बजाय मौजूदा दौर की कोचिंग और टेस्ट क्रिकेट की चुनौतियों पर बातचीत की।
आधुनिक क्रिकेट की कोचिंग पर हुई चर्चा
गैरी कर्स्टन के मुताबिक, बातचीत का केंद्र आज के दौर में कोचों के सामने आने वाली चुनौतियां और टेस्ट क्रिकेट को लेकर दोनों की सोच रही। उन्होंने कहा कि दोनों के लिए टेस्ट क्रिकेट के मूल्यों और खिलाड़ियों से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कराने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है।
कर्स्टन ने बताया कि उन्होंने इस बात पर भी चर्चा की कि अलग-अलग परिस्थितियों में खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए किस तरह तैयार किया जा सकता है।
हार के बावजूद श्रीलंका के जज्बे से खुश
भारत ने गॉल में खेले गए पहले टेस्ट में श्रीलंका को 165 रन से हराया, लेकिन कर्स्टन अपनी टीम के प्रदर्शन के सकारात्मक पहलुओं से संतुष्ट नजर आए। तीसरे दिन श्रीलंका ने 99 रन पर पांच विकेट गंवा दिए थे और टीम मुश्किल स्थिति में थी। इसके बावजूद खिलाड़ियों ने मुकाबला छोड़ा नहीं और मैच को पांचवें दिन तक ले जाने में सफल रहे।
कर्स्टन ने टीम के संघर्ष और सकारात्मक रवैये की तारीफ करते हुए कहा कि खिलाड़ियों ने कठिन परिस्थितियों में वापसी की कोशिश की और अंत तक मैच में बने रहने का जज्बा दिखाया।
बल्लेबाजी में सुधार की जरूरत
श्रीलंका के कोच ने माना कि मुकाबले में टीम की सबसे बड़ी कमजोरी बल्लेबाजी रही। खासकर दोनों पारियों में शीर्ष क्रम भारतीय गेंदबाजों के सामने लंबी पारी खेलने में नाकाम रहा। कर्स्टन के मुताबिक, अगर बल्लेबाजी विभाग में सुधार किया जाता है तो टीम भविष्य के मुकाबलों में बेहतर नतीजे हासिल कर सकती है।
युवा खिलाड़ियों को तैयार करने पर जोर
श्रीलंकाई टीम के साथ अपने नए अनुभव को लेकर कर्स्टन उत्साहित हैं। उनका मानना है कि टीम में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की कमी नहीं है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट के कम मुकाबले मिलने की वजह से युवा खिलाड़ियों को इस प्रारूप की मांग समझने और उसके अनुसार ढलने में समय लग रहा है।
कर्स्टन का लक्ष्य खिलाड़ियों को लगातार बेहतर बनाना और एक ऐसी मजबूत टीम तैयार करना है, जो लंबे प्रारूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन कर सके।















